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suryaprakashtiwadi


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ढूँढो आजादी.……

Posted On: 14 Aug, 2014  
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भक्ति का अपमान बंद हो

Posted On: 29 Jul, 2014  
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मिलन प्यार का “contest “

Posted On: 14 Feb, 2014  
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बापूजी की शांति

Posted On: 1 Oct, 2013  
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औपचारिकता ही है हिन्दी पखवाडा मनाना “contest “

Posted On: 8 Sep, 2013  
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हिन्दी सिर्फ भाषा बनकर रह गई,राष्ट्रभाषा नहीं”contest “

Posted On: 2 Sep, 2013  
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सपनो की आजादी

Posted On: 15 Aug, 2013  
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Hindi Sahitya Others Others Politics में

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दो हजार में नवजात बेटी को बेंचा माँ ने

Posted On: 10 Apr, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अंग्रेजो से अगर आजादी पानी ही थी तो अंग्रेजी के गुलाम क्यों बन गए.क्यों स्वदेशी के नारे लगाये गए और क्यों हमें स्वदेशी भाषा से लगाव नहीं है और क्यों हमें इस भाषा को अपनाने से शर्म आती है ?क्यों हम गर्व के साथ हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का सम्मान नहीं देते ?इन सवालो को लेकर कई विद्वान ये तर्क दे सकते है की हिन्दी का अस्तित्व कायम है और उसकी शान बरकरार है,लेकिन ये अर्धसत्य है.जिस व्यापकता से हर जगह अंग्रेजी का ही उपयोग हो रहा है और हिन्दी को अस्वीकार किया जा रहा है तो ऐसे में हिन्दी कहा पर है ?आई ए एस की परीक्षा हो या कोई अन्य बड़ी परिक्षाए अंग्रेजी में ही ली जाती है.हिन्दी माध्यम में पढाई करना और कराना शर्म की बात समझी जाती है.जिस प्रमाण में अंग्रेजी माध्यम के शिक्षण संस्थान है,उसी प्रमाण में हिन्दी दिखाई तक नहीं देती तो ऐसे में निजी उपक्रम हो या सरकारी उपक्रम हिन्दी का उपयोग किस प्रकार होगा.बल्कि 15 अगस्त को जिस तरह आजादी का दिन मनाया जाता है,उसी तरह हिन्दी दिवस पर हिन्दी पखवाडा मनाकर हिन्दी को अपनाने की औपचारिकता मनाई जा रही है और ये सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक प्रशासनिक स्तर पर हिन्दी के उपयोग को कड़ाई से अमल में लाने के उपाय नहीं अपनाये जाते.यहाँ तक की कई विदेशी इस भाषा को हमारी संस्कृति को सिखने हिंदुस्तान आ रहे है और हम अपनी ही भाषा को पराया कर रहे है.जिस तरह जापान और चीन में उनकी मातृभाषा को बड़े ही गर्व के साथ अपनाकर वे देश उन्नती की राह पर आगे बढ़ रहे है,उस तरह हम हिंदुस्तानी क्यों नहीं अपनी हिन्दी को वो पहचान दिलाने के लिए कमर नहीं कसते,जिसकी वो हकदार है.हर हिंदुस्तानी का ये कर्तव्य है की इस भाषा को औपचारिकता की हदों से निकालकर गर्व के साथ पूर्ण रूप से अपनाये। सही कहा

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

के द्वारा: Jayprakash Mishra Jayprakash Mishra

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के द्वारा: राजेंद्र भारद्वाज राजेंद्र भारद्वाज

सूर्य प्रकाश जी.......... जैसा की आपने कहा है की........... भारतीय युवाओ की प्रेरणा कही जानेवाली ऐश्वर्य राय ने फिल्म गुजारिश में जो धुम्रपान का दृश्य दिया है वह क्या हमारी सभ्यता पर आघात नहीं है ?यह मुद्दा इन दिनों न्यूज चैनलों पर बहस का मुद्दा बना हुआ है. ये बड़े खेद का विषय है की नकारात्मक विषय हमेशा न्यूज चैनलों पर बहस का मुद्दा बनकर और चर्चा पाते हैं............ जब आमिर खान ...... रंग दे बसंती जैसे फिल्म में काम करते हैं तो युवाओं को देश के लिए कुछ करने का जज्बा नहीं जगता हैं...........ऋतिक रोशन लक्ष्य जैसी फिल्म में कम करके युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित नहीं कर पाते.................. ये न्यूज चैनलों पर चल रही बहस का ही मुद्दा है की राहुल गाँधी युवा वर्ग के नेता बता दिए जाते हैं.......... और ऐसा प्रचारित किया जाता है की मानो वो केंद्र की सरकार से भिन्न व्यक्ति हैं........... और देश में हो रहे मामलो में उनका कोई दायित्व ही नहीं है.............

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

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